संघ के मामले में मोदी सरकार ने यूपीए को दिया एक और बड़ा झटका

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जब अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार थी तब उन्होंने भारत की उन्नति के लिए धार्मिक, शिक्षा और सामाजिक संस्थानों को समाज की भलाई के लिए काम करने हेतु जमीनें आवंटित की थी,, इनमे से अधिकतर जमीन RSS से जुड़े संगठनों को मिलने वाली थी..!! जिन जमीनों पर यूपीए सरकार ने आते ही मनमोहन जी ने सभी आवंटनो को ख़ारिज कर दिया था सोनिया की बात सुन कर

शहरी विकास मंत्री वैंकया नायडू जी ने जानकारी देते हुए कहा की सामाजिक भाली के लिए दी गई जिन जमीनों के आवंटन को 2001 की मनमोहन सरकार ने ख़ारिज कर दिया था उनमे से कुछ को छोड़कर सभी जमीने फिर से उन्हें आवंटित कर दी जाएगी..!!

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आप को बता दें की मोदी सरकार के आते ही इन संगठनों ने सरकार के पास जाकर शिकायत दर्ज करायी थी, जिस कर कार्यवाही करते हुए वैंकया नायडू जी ने एक पैनल का घठन किया जिसने जाँच में पाया की सच में यूपीए सरकार ने भेदभाव किया है इसलिए सभी जमीनें फिर से वापस देने का फैसला लिया जायेगा

2001 में डॉक्टरमोहन कि यूपीए सरकार ने ऐसे 29 संगठनों को जमीना फैसला रद्द कर दिया था। यूपीए का कहना था कि आवंटन की प्रक्रिया में अनियमितता पाई गई। तत्कालीन यूपीए सरकार ने रिटायर्ड अफसर योगेश चंद्र को नियुक्त किया था। योगेश ने विभिन्न संगठनों को आवंटित जमीनों के करीब 100 मामलों की जांच की थी।

सूत्रों ने कहा कि जिन संगठनों को जमीनें अब वापस मिलेंगी, उनमें श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मृति न्यास, विश्व संवाद केंद्र, धर्म यात्रा महासंघ, अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम आदि प्रमुख हैं। द टाइम्स ऑफ इंडिया ने फरवरी 2015 में पहली बार खबर दी थी कि किस तरह मोदी सरकार इन संगठनों को आवंटित जमीन रद्द किए जाने से जुड़े यूपीए-1 के 10 साल पुराने फैसले का रिव्यू करने में दिलचस्पी दिखाई थी। जिन 29 संगठनों का अलॉटमेंट रद्द किया, उनमें से 23 ने कोर्ट में फैसले को चुनौती दी थी। बाकी मामलों में जमीन सरेंडर कर दिया गया।

सूत्रों के मुताबिक, अब कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद शहरी विकास मंत्रालय अब दिल्ली हाई कोर्ट का रुख कर सकता है। यहां इस मामले पर एक केस लंबित है। सरकार आवंटन रद्द किए जाने के फैसले को पलटने का आग्रह कर सकती है।

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