मोदी सरकार ने शुरू किया चीन से जुड़ें इलाको की सुरक्षा को बढ़ाना तैनात कि अपनी सबसे शक्तिशाली मिसाइल

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चीन वर्षो से भारत को आंख दिखाता आया है जिसका सबसे बड़ा कारण भारत के नेतृत्व की कमजोरी थी, पहले की सरकारें भारतीय सेना का ख्याल नहीं रखा करती थी जिसका सबसे बड़ा उदाहरण यही था की कांग्रेस ने सेना से जुड़े बोफोर्स घोटाला, अगस्त डील घोटाला, जूता घोटाला आदि किये है,

लेकिन अब भारत में जब से मोदी सरकार आई है देश की सेना मजबूत होती जा रही है DRDO अक से बढ़कर एक मिसाइलो की लगातार परिक्षण करते जा रहा है जिसके कारण चीन और पाकिस्तान परेशान हो रहे है, लेकिन अभी भी चीन से जुड़े इलाको में भारतीय सेना की शक्ति कम थी लेकिन मोदी सरकार अब बड़े मात्र में हथियारों का चीन से जुड़े इलाको में  लगते जा रही है

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आगे देखिये मोदी सरकार ने कौनसी मिसाइलो की की है तैनाती 

अग्नि-3 (3 हजार Km रेंज) मिसाइल को सेना के स्ट्रैटिजिक फोर्सेज कमांड को सौंपा जा चुका है।

अग्नि-4 (4 हजार Km) और अग्नि-5 (5 हजार Km) के फाइनल ट्रायल जारी, जल्द शामिल किए जाएंगे।

सुखोई-30MKI फाइटर जेट्स, जासूसी ड्रोन्स और कई हेलिकॉप्टर्स नॉर्थ ईस्ट में तैनात किए गए हैं।

T-72 टैंकों को पूर्वी लद्दाख और सिक्किम में तैनात किया गया है। जमीनी मुकाबले के लिए ताकत बढ़ेगी।

36000 सैनिकों की दो इन्फन्ट्री 2009-2010 में असम के लिकाबाली और मिसामारी में तैनात किए जा चुके हैं।

17 माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स का निर्माण 2021 तक पश्चिम बंगाल के पानागढ़ में होगा। इसमें 90000 सैनिक होंगे।

6 सुपर हरक्यूलिस विमान पश्चिम बंगाल के पानागढ़ में ही 2017 मध्य तक तैनात किए जाएंगे।

आकाश मिसाइलों के छह दस्ते नॉर्थ ईस्ट में तैनात किए जा रहे हैं। जमीन से हवा में मार करने वाले में सक्षम।

ब्रह्मोस मिसाइलों को अरुणाचल में तैनात किया जाएगा। अंडमान-निकोबार में सेना की मौजूदगी मजबूत की जा रही है।

अडवांस लैंडिंग ग्राउंड (एएलजी) सुदूर इलाकों में बेहतर कारगर होते हैं। लद्दाख और अरुणाचल में शुरू किए गए।

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