जम्मू-कश्मीर में 60 प्रतिशत कम हुई हिंसा रिपोर्ट्स

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1947 के बटवारे के बाद से ही कश्मीर में हिंसा चली आ रही है, जिसमे अलगाववादी सबसे बड़ा रोल ऐडा करते है कश्मीर के लोग कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाने के लिए ६८ सालो से हिंसा करते आये है लेकिन भारत कश्मीर में चलती हिंसा से लड़ते आया है

पिछले कुछ वर्षो में लेकिन हिंसा बहोत बढ़ शुकी थी, हर शुक्रवार जुम्मे की नमाज के बाद सेना के ऊपर पथराव की खबरे आती ह थी साथ ही पाकिस्तान के झंडे दिखाना, ISIS के झंडे दिखाना आम हो गया था, मोदी सरकार के बनने के बाद हिंसा में बढ़ोतरी हो गयी थी जिसकी जाँच करवाने पर पता चला की अलगाववादियों द्वारा पत्थर फेकने वालो को दिन का 500 रूपए दिए जा रहे है, ज्सिकी वजह से सेना के खिलाफ हिंसा बढ़ गयी थी

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लेकिन 8 नवम्बर 2017 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नोटबंदी के ऐलान के बाद से ही हिंसा में गिरावट दर्ज की गयी जिसका बड़ा कारण नोटबंदी को माना जा रहा था, क्यूंकि पकिस्ता से आने वाला पैसा और नकली नोट पूरी तरह से बंद हो गया था जिसकी वजह से अलगाववादी पत्थर फेकने वालो को पैसे नहीं दे पा रहे, साथ ही दिसम्बर में बाहर आई एक रिपोर्ट के मुताबिक कश्मीर के बेंको में जमा किये गए 500 और 1000 के नोट अधिकतर नकली थे..

जनवरी में राष्ट्रिय सुरक्षा एजेंसी द्वारा पेश किये गए रिपोर्ट में खाबर आई है की नोटबंदी ने पूरी तरह अलगाववादियों की कमर टूट चुकी है जीके कारण उनके पास पैसा नहीं है जिसकी वजह से कश्मीर हिंसा में 60% कमी आई है क्यूंकि लड़के बिना पैसे लिए सेना का विरोश करने तैयार नहीं है….!!

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